story in hindi (हिंदी कहानी ) Kabir aur Badshah -

story in hindi (हिंदी कहानी ) Kabir aur Badshah

बुखारे (देश) का बादशाह

बुखारे के बादशाह इब्राहिम अधम को परमार्थ का शौक हुआ। वह फकीरों की तलाश में रहने लगा लेकिन ऐसो आराम की जिंदगी भी जीता रहा। उसकी सेज सवा मन फूलों से तैयार होती थी। एक दिन उसने अपने दो मंजिला मकान के ऊपर से देखा कि दो आदमी घूम रहे हैं। पूछा कौन हो भाई? उन्होंने कहा हम सारबान हैं। कैसे आए? कहने लगे की हमारा ऊंट खो गया है? तब बाद शाह ने कहा कभी ऊंट भी महलों की छत पर आते हैं? जवाब मिला कभी परमात्मा भी सवा मन फूलों की सेज पर मिलता है?

Badshah ko Fakiro ki talash

इतनी बात कह कर वे दोनों गायब हो गये। और बादशाह बेहोश हो गया। जब उसे होश आया तो उसकी सोच ने पलटा खाया और वह परमात्मा की तलाश में अपने मुल्क के फकीरों के पास जाने लगा। लेकिन तसल्ली ना हुई। हिंदुस्तान में आया बहुत ढूंढा लेकिन फिर भी तसल्ली ना हुई। आखिर वह काशी जा पहुंचा। कबीर साहिब के आगे अर्ज की कि उसे शागिर्द बना लो। कबीर साहिब ने कहा तू एक बादशाह है। मैं एक गरीब जुलाहा। तेरा मेरा गुजारा कैसे होगा? प्रार्थना की कि बादशाह बनकर तेरे द्वार पर नहीं आया।

Badshah Ka Kabir shahib ki sharan me jaana

story in hindi (हिंदी कहानी ) Kabir aur Badshah

एक गरीब भिखारी बनकर आया हूं खुदा के लिए मुझे बख्श लो। औरतें नरम दिल की होती हैं माता लोई ने जो कबीर साहिब की पत्नी थी सिफारिश की तो उसे रख लिया। बादशाह जुलाहे के घर नलिया बटने और ताना तन ने का काम करने लगा। छः साल गुजर गए। एक दिन माई लोई ने कबीर साहिब से प्रार्थना की कि यह बादशाह और हम गरीब जुलाहे। जो हम खाते हैं वही खाकर यह चुप रहता है। इसको कुछ दे दो। कबीर साहिब ने कहा कि अभी इसका हृदय निर्मल नहीं हुआ। माई लोई ने कहा इसकी क्या पहचान है?

Kabir shahib dwara Badshah ki Pariksha

रूखी सूखी खाकर यह हमारी सेवा करता है। हुकुम मानने से इंकार नहीं करता इसका ह्रदय कैसे निर्मल नहीं है? कबीर साहिब कहने लगे अच्छा ऐसा करो। घर का कूड़ा करकट लेकर छत पर चढ़ जाओ। मैं इसको को बाहर भेजता हूं। जब यह जाने लगे तो सिर पर डाल देना और पीछे हटकर कान लगाकर सुनना की क्या कहता है। Is story in hindi जब माई लुई ऊपर गई तो कबीर साहिब ने कहा बेटा मैं कुछ बाहर भूल गया हूं उसे अंदर ले आओ। जब वह बाहर गया तो माई लोई ने कूड़े करकट का टोकरा सिर परदा डाल दिया।

 

और पीछे हट कर सुनने लगी। वह गुस्से में बोला अगर होता बुखारा तो जो करता तो करता। माई लोई ने आकर कबीर साहिब को बताया कि जी। ऐसा कहता था। कबीर साहिब ने कहा कि मैंने जो तुमसे कहा था कि अभी ह्रदय साफ नहीं हुआ नाम के काबिल नहीं हुआ। 6 साल और बीत गए। एक दिन कबीर साहिब ने कहा कि अब बर्तन तैयार है। माइ लोई ने कहा कि जी मुझे तो कोई फर्क नहीं दिखाई देता। जैसा पहले था वैसा ही अब है। कबीर साहिब के घर साधु महात्मा आते रहते थे। कई बार ऐसा मौका आता कि खाने पीने को कुछ नहीं होता था तो भुने हुए चने खा कर ही सोना पढ़ता था।

 Story in hindi : Badshah ki dusri pariksha

माई लोई ने कहा जिस तरह वह पहले हमारे हुक्म उसे इंकार नहीं करता था। हम भी उसी तरह है। जो कुछ हम देते हैं। वही खा लेता है। कबीर साहिब ने कहा अगर फर्क देखना चाहती है तो पहले तो घर का कूड़ा करकट ले गई थी अब और गंदगी बदबू वाली सड़ी गली चीजें कट्ठा करके ले जा। जब गली से निकले इसके सिर पर डाल देना। माई लोई ने ऐसा किया। जब बादशाह बाहर निकला तो माई लोई ने वह जो इकट्ठा की हुई गंदगी थी उसके सिर पर डाल दिया। बादशाह हंसा खुश हुआ उसका मुंह लाल हो गया। वह कहने लगा शाबाश हो डालने वाले। तेरा भला हो यह मन अहंकारी था। इसका यही इलाज था। माई लोई ने आकर कबीर साहिब को बताया। Hindi Story :(हिंदी कहानिया )Guru nanak aur shahukar pdne ke liye yahan click kare

की जी। अब तो वह ऐसे कहता था। कबीर साहिब ने कहा मैं जो तुमसे कहता था कि अब कोई कसर बाकी नहीं है। कबीर साहिब जैसा संत सतगुरु बादशाह जैसा शिष्य फिर और क्या चाहिए था। जैसे ही कबीर ने उसे नाम दिया। उसकी रूह ऊपर चढ़ गई। फिर कबीर साहिब ने कहा जा अब जहां मर्जी जाकर बैठ जा तेरी भक्ति पूरी हो गई है। नाम बहुत बड़ी दौलत है जिसको पाकर फकीर सात विलायतो की बादशाही को ठोकर मार देता है। नाम की कमाई कोई मजाक नहीं है। गुरु नानक साहिब ने 11 साल पत्थरों अंको का बिछौना किया। गुरु अमरदास जी ने 12 साल पानी ढोया। हे जितना पवित्र होता है नाम उतनी ही जल्दी असर करता है।