Story in Hindi: hindi kahani Fakir Aur Shahukaar -

Story in Hindi: hindi kahani Fakir Aur Shahukaar

  Story in Hindi: hindi kahani Fakir Aur Shahukaar

फकीर और साहूकार

मम कारण सब परिहरै आपा अभिमान। सदा अखंडित उर धरै बोलै  भगवान। – संत दादू दयाल

एक फकीर का नियम था कि वह जिस गांव में जाता था रोटी ऐसे व्यक्ति के घर खाता था जिसकी कमाई हक की होती थी। वह पहले पूछताछ कर लेता था । एक दिन इत्तेफाक से वह एक जंगल में जा रहा था। वहां उसे एक आदमी मिला।

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फकीर ने उससे पूछा कि पास वाले गांव में क्या कोई हक की कमाई करने वाला व्यक्ति है? उसने कहा कि अमुक साहूकार है। पूछा उसके पास कितना रुपया है? कहने लगा कि एक लाख के करीब। उसके कितने पुत्र हैं? चार । यह पूछ कर वहां उस गांव में गया। साहूकार के पास पहुंचा और कहा लाला जी रोटी खानी है। साहूकार ने कहा आओ महात्मा जी बड़ी खुशी से खाओ। फिर फकीर ने कहा कि केवल दो बातें आपसे पूछनी है साहूकार ने कहा हुकुम करो।

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महात्मा ने पूछा कि तुम्हारे पास कितना रुपया है ? साहूकार ने जवाब दिया कि पचास हज़ार । फिर पूछा कि तुम्हारे कितने पुत्र हैं? साहूकार ने जवाब दिया कि एक। महात्मा उठकर चल पड़ा । यह सोचते हुए कि साहूकार झूठ बोल रहा है फकीर उसके घर से जाने लगा। साहूकार को बड़ी हैरानी हुई। साहूकार ने हाथ जोड़कर अर्ज की कि महात्मा जी नाराज हो गए चल क्यों पड़े? महात्मा क्रोधित होकर बोला कि मैं ने तो धर्मात्मा समझा था। हक कमाई वाला समझा था।

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तू तो झूठ की गठरी निकला। तू बता। मैं तेरे पुत्र ले जाता कि तेरी कमाई बांट लेता। साहूकार ने उत्तर दिया महात्मा जी पहले मेरी अरज सुन लो रोटी खाओ चाहे ना खाओ। मेरा एक बेटा परमार्थ में मेरी मदद करता है बाकी सब शराबी कबाबी हैं। वे अपना पिछला कर्ज वसूल करने आए हैं। और मैंने आज तक पचास हज़ार रुपए परमार्थ में लगाया है बाकी का पता नहीं चोरों ने ले जाना है कि ठगों ने।

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इसलिए मैंने कहा कि मेरा एक पुत्र है और पचास हज़ार रुपए है। फकीर ने दयालु होकर मुस्कुराते हुए कहा बेटा माफ करना। मुझे अब पता चला कि आपने सच बोला था। मैं बड़ी प्रसन्नता से आपका भोजन स्वीकार कर लूंगा। मतलब यह है कि जो धन और संबंधी परमार्थ में मदद करें वही असल में अपनी है।

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