Hindi story हिंदी कहानी in hindi story

Hindi story हिंदी कहानी in hindi story

संत कैसे जिंदगी बदल देते हैं

सत्गुर की क्या महिमा करें वह नीच से नीच और पापी से पापी जीवो को भी गले से लगा लेते हैं।- महाराज सावन सिंह

एक बार बारिश के मौसम में कुछ साधु महात्मा अचानक कबीर साहिब के घर आ गए। 

बारिश के कारण कबीर साहिब बाजार में कपड़ा नहीं बेंच सके थे। और घर में मेहमानों के लिए खाना भी काफी नहीं था। इस   में  उन्होंने अपनी पत्नी लोई से पूछा।  क्या कोई दुकानदार कुछ रसद (आटा दाल) हमें उधार दे देगा। जिसे हम बाद में कपड़ा बेंच कर चुका देंगे। पर एक फकीर जुलाहे को भला कौन देता। जिसकी कोई निश्चित आय भी नहीं थी। लोई कुछ बनियों की दुकानों पर गई पर सभी ने नगद पैसे मांगे। आखिर एक बनिया उधार देने को तैयार हो गया। पर उसने यह शर्त रखी कि वह एक रात उसके साथ बिताए। यह नीचता भरी उसे बुरी तो बहुत लगी । लेकिन वह खामोश रही ।

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  जितनी रसद उसे चाहिए थी बनिए ने दे दी। जल्दी से घर आ कर लोई ने खाना बनायालोई और जो बातचीत बनिए से हुई थी । कबीर साहिब को बता दी। रात होने पर कबीर साहिब ने लोई से कहा कि बनिए का कर्ज चुकाने का वक्त आ गया है लोई और यह भी कहा कि चिंता मत करना मालिक सब ठीक करेगालोई जब हो तैयार हो गई तो वे बोले बारिश हो रही हैलोई और गली कीचड से भरी है। तुम कंबल ओढ़ लो मैं तुम्हें कंधे पर उठाकर ले चलता हूं। जल्दी ही दोनों बनिए के घर पहुंच गए लोई अंदर चली गई। और कबीर साहिब दरवाजे के बाहर उसका इंतजार करने। लगे लोई को देखकर बनिया बहुत खुश हुआ। पर जब उसने देखा कि बारिश के बावजूद ना लोई के  कपडे भीगे हैं। और ना ही पांव पर कीचड़ लगा है।  तो उसे बहुत हैरानी हुई उसने पूछा क्या कारण है।

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कि कीचड़ से भरी गली में से तुम आई हो फिर भी तुम्हारे पांव पर कीचड़ का  एक  छीटा भी नहीं? मैंने जवाब दिया इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है। मेरे पति मुझे कंबल ओढ़ाकर अपने कंधे पर बिठाकर यहां लाए हैं। यह सुनकर बनिया दंग रह गया। लोई का निर्मल निष्पाप चेहरा देखकर वह बहुत प्रभावित हुआ। और अविश्वास से उसे देखता रहा। जब लोई ने कहा कि उसके पति कबीर साहिब वापस ले जाने के लिए बाहर इंतजार कर रहे हैं। तो बनिया अपनी नीचता और कबीर साहिब की महानता को देख शर्म से पानी पानी हो गया । उसने लोई और कबीर साहिब दोनों से घुटने टेक कर माफी मांगी। उठो मेरे भाई कबीर साहिब बोले। लाखों में शायद ही कोई एक आधा जीव होगा जो कभी रास्ते से भटका ना हो। कबीर साहिब और उनकी पत्नी अपने घर लौट आए । बनिया देर रात तक बीती हुई घटना के बारे में सोचता रहा। अंत में इस नतीजे पर पहुंचा कि संसार में एक ही सच्चा मार्ग है। और वह परमार्थ। सुबह कबीर साहेब को ढूंढता हुआ उनके घर पहुंचा। और समय बीतने पर उनके प्रेमी शिष्यों में गिना जाने लगा। भूले भटके हुए जीवन को सही रास्ते पर लाने के लिए संतो के अपने ही तरीके होते हैं।