Hindi kahania : Story in hindi महात्मा ख्वाजा हाफिज -

Hindi kahania : Story in hindi महात्मा ख्वाजा हाफिज

Hindi kahania : Story in hindi महात्मा ख्वाजा हाफिज

नाल शराबे रंग मुसल्ला

संत सतगुरु की लिव परमपिता के साथ निरंतर लगी रहती है इसलिए केवल वही अपने शिष्य का अचूक मार्गदर्शन कर सकता है और राह में आने वाले अनेक खतरों से उसे बचा सकता है। -महाराज सावन सिंह 

जब पारस के मशहूर सूफी महात्मा ख्वाजा हाफिज ने अपने दीवान में कहा कि ” ब मैं सज्जादाह रंगी कुन गरत पीरे मुगाम गोयद “यानी अगर मुर्शिद हुक्म दे तो शराब में मुसल्ला रंग ले, तो इस बात पर हंगामा मच गया क्योंकि कुरान मजीद के अनुसार मुसलमानों में शराब हराम मानी जाती है और ऐसी बात कहना कुफ्र है।

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पहले इंसाफ करना काजियों के हाथ में होता था । लोगों ने जाकर बड़े काजी को कहा कि अमुक आदमी ने कुफ्र का कलमा कहा है। हाफिज साहिब को काजी के पास बुलाया गया। काजी ने कहा तुमने कुफ्र का कलमा कहा है या तो इसका मतलब समझाओ या अपना कलमा वापस लो। ख्वाजा हाफिज ने  कहा कि फकीर अपना कलमा वापस नहीं ले सकते क्योंकि जो मालिक ने अंदर से हुक्म दिया मैंने बाहर कह दिया। एक दूसरे काजी ने इस कलमें का मतलब पूछा।

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हाफिज साहिब ने कहा कि वह जो सामने पहाड़ी है वहां पर एक फकीर बैठा है उसके पास जाओ वह तुम्हें इस सवाल का जवाब देगा। काजी वहां पहुंचा। जब उस फकीर से मतलब पूछा गया तो उसने मुस्कुराते हुए कहा कि वह जो सामने शहर है उसमें अमुक मकान है वहां अमुक वैश्या है। उसके पास जाओ। यह लो ₹2 लेते जाओ। Hindi kahania : Story in hindi महात्मा ख्वाजा हाफिज वह वैश्या इस सवाल का जवाब देगी। काजी को बहुत गुस्सा आया किए अजीब तरह के फकीर हैं यह कहता है कि मुसल्ला शराब में रंग लो दूसरा कहता है कि वैश्या के घर जाओ।

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काजी ने सोचा खैर तहकीकात जरूरी है। चलो देखें तो सही मामला क्या है? आखिरकार काजी उस शहर में गया। वैश्या का मकान पूंछकर वहां पहुंचा। उस समय वेश्या कहीं गई हुई थी लेकिन महलदारन घर पर थी। उसने सोचा कि मेहमान अमीर मालूम होता है आसामी मोटी है बहुत कुछ हासिल होगा। वैश्य ने एक लड़की को पाल पोस कर बड़ा किया था और अब वह जवान हो गई थी। महलदारन ने उस लड़की  से कहा देख हम जो कुछ करते हैं तुझे पता है यह हमारा पेशा है। इसलिए तुझे भी यह काम करना पड़ेगा। हमने तुझे इसी काम के लिए खरीदा है। अब तू जवान हो गई है।

आखिर उस लड़की को सजा संवार कर काजी के कमरे में छोड़ आई। कि ग्राहक आया है खाली ना जाए। लेकिन वह लड़की बहुत उदास थी उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। काजी ने सोचा कि अगर यह वैश्या होती तो हंसी खुशी के साथ आती लेकिन यह वेश्या नहीं है यह कुछ और ही मामला है। यह सोचकर काजी ने पूछा कि तुम क्यों रो रही हो? लड़की चुप रही? काजी ने फिर पूछा लड़की फिर भी कुछ ना बोली। आखिर काजी ने कहा बेटी मैं तुम्हें कुछ नहीं कहता। बता तू कौन है ? लड़की ने धीरे-धीरे रोते-रोते जवाब दिया कि मैं मुसीबत की मारी हूं। आज तक मैं पवित्र रही लेकिन आज पहली बार मैं बुरे कामों में पढ़ने जा रही हूं। मालूम नहीं क्या हाल होगा। काजी ने कहा कि तू डर मत। मैं तुझसे कुछ नहीं कहता।

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सच सच बता कि तू है कौन? लड़की कहने लगी कि मुझे थोड़ा-थोड़ा याद है कि मैं जब छोटी सी थी हमारे गांव में डाका पड़ा था, सब लोग भाग गए। मैं भी भागी लेकिन मुझे डाकू ने पकड़ लिया। वह मुझे यहां इसके घर बेंच गए। काजी ने पूछा कि तेरा गांव कौन सा था। लड़की ने कहा कि मुझे थोड़ा थोड़ा याद कि मेरा अमुक गांव था। वही काजी का गांव था। काजी ने सोचा कि यह तो अपने ही गांव की लड़की है। दिल में जोश आया। फिर पूछा कि क्या तुझे याद है कि तेरे मोहल्ले का क्या नाम था? लड़की ने कहा मुझे थोड़ा-थोड़ा याद है कि हमारे मोहल्ले का यह नाम था।

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वह काजी का अपना मोहल्ला था। अपने मोहल्ले की लड़की थी इसलिए और तहकीकात का ख्याल आया। उसने पूछा कि तेरे बाप का क्या नाम था? लड़की ने कहा कि मैं छोटी सी पर मुझे थोड़ा-थोड़ा याद है कि मेरे बाप का नाम यह था। वह का जी साहिब खुद थे रोकर गले से लगा लिया और कहा कि तू मेरी बेटी है तुझे ही डाकू पकड़ कर ले गए थे लड़की की बांह पकड़कर उस फकीर के पास ले गया। उसने कहा कि बाहर से तो लगता था कि आपने मुझे बुरा काम करने के लिए भेजा था लेकिन अंदर से आपका कुछ और ही इरादा था।

मुझे अब पता चला कि अंदर से आपका मतलब मुझे मेरी बेटी से मिलाना था। उस फकीर ने कहा कि ख्वाजा साहिब से कहो इसका अगला मिसरा भी कह दे । जब हाफिज साहिब के पास आया तो बोला कि इसका अगली लाइन भी कह दो। तब हाफिज साहिब ने कहा 

किह सालिक बेखबर न बुवद जि राहो – रस्मे मंजिल है।

अर्थात् मार्गदर्शक मंजिल की राह के भेद और रीति से अनजान नहीं है।

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